Wednesday, August 11, 2010

डर

कोई नहीँ है ;
चारोँ ओर
खुला आसमान है !
फिर भी हम
पंखोँ को खोलकर
उड़ने से डरते हैँ !

हाँ , हम डरते हैँ !
डरते हैँ ;
अनन्त मेँ
गुम न जाएँ
कहीँ !

हम
सत्य से
दूर भागते हैँ
क्योँकि हम
संसार को
सत्य मान वैठे हैँ !

Monday, April 26, 2010

जिँदगी

हवा का झोँका आया और मुझे होश आ गया । अब सोच रहा हूँ कि अब तक कहाँ था । जिँदगी को यादोँ मेँ मैँने कहीँ खो दिया था । समय यादोँ को अपनी निगाहोँ मेँ कैद कर लेता है । पर हमेँ उनसे बाहर भी तो निकलना है । यादेँ कुछ दे जाती हैँ । वे खुशियाँ दे जाती हैँ ; गम दे जाती हैँ । इनसे बेहतर वे अनुभव का ज्ञान दे जाती हैँ । वे हमेँ सिखा जाती हैँ कि सही मार्ग कहाँ है । हम जिस रास्ते पर चलना चाहते हैँ , वह यहाँ नहीँ है । वह कहीँ और है ; जहाँ खुशियोँ की बहार आती है ।


यादेँ हमेँ सिखाती हैँ कि अब हम बदल गये हैँ । बचपन मेँ जब हम मासूम थे तो हमारे सोचने का तरीका हमारा खुद का था । तब हम नए नए प्रश्न करते रहते थे । लेकिन अब हमारी सोच पर बहुत सारा बोझ लाद दिया गया है । जिसे लेकर हम चल रहे हैँ । जब हमारी सोच स्वतंत्र नहीँ है तो फिर हम खुद को बेहतर कैसे बना सकते हैँ । हमेँ अपने दिमाग के कारखाने से कचरे को हटाना होगा । न जाने कितने विचार जो हमेँ सही लगते हैँ , गलत हैँ ।
इन गलत विचारोँ पर सोचने का समय तब शायद हमेँ मिल पाये ।


लेकिन हमेँ आज मेँ जीना होगा । बीते कल की बात करके तो सिर्फ समय गुजारा जा सकता है । कुछ हासिल करना है तो हमेँ वर्तमान मेँ जीना होगा । आज के परिप्रेक्ष्य मेँ योजनाएँ बनानी होँगी । आज की स्थितियोँ मेँ प्रयास करने होगेँ । जिँदगी को समझने के तरीके अब बदल चुके हैँ । वक्त ने खुद को बदल लिया है । संस्कृति , परिवेश और विचार भी बदल गये हैँ ; तो हमेँ भी नए तरीकोँ को समझना होगा । पुराने तरीकोँ से सफलता नहीँ मिल सकती क्योँकि पुरानी सोच मेँ माहौल की जंग लग जाती है । उसे हटाने मेँ हमेँ बर्षोँ लग सकते हैँ । इससे बेहतर है नयी कोशिशेँ कीजिए । आसमान को छूने की ये कोशिशेँ तुम्हे आसमान की ओर ले जायेँगी , जहाँ जिँदगी है ।


जिँदगी को पाने की कोशिश क्या कभी आपने की है ? यदि नहीँ तो आप नहीँ जानते कि जिँदगी क्या है । आप बस इतना जानते हैँ कि ऊँचाईयोँ पर खुशियाँ मिलती हैँ । लेकिन आप गलतफहमी मेँ हैँ । प्यार छोटी बस्ती की गलियोँ मेँ पाया जाता है और वे इसे हासिल करने की कोशिश नहीँ करते जो इसे पहचानते हैँ । ये लोग सहयोग , समर्पण , प्रतीक्षा आस्था , संतुष्टि और संस्कारोँ को साथ लेकर चलते हैँ तो इन्हे जिँदगी मिल जाती है ; कुँए से पानी खीँचती किसी लड़की की मुस्कुराहट मेँ ; यहाँ से वहाँ उछलकूद करती गिलहरी मेँ । जिँदगी को पाना जरूरी है । खुशियाँ जिँदगी के साथ मुफ्त मेँ मिलती हैँ और सफलता के साथ चलती हैँ । लेकिन ऊँचाइयोँ पर पहुँचकर आप खुश रहेँगे इस बात की कोई गारंटी नहीँ है । क्योँकि तब लोगोँ की ईर्ष्या , समय की कमी और आधुनिकता के प्रचार का आपको सामना करना पड़ेगा । खुशियाँ मार्केट मेँ नहीँ मिलतीँ । ये कुदरती उपहार होती हैँ ; जिन्हे हम जब चाहे तब पा सकते हैँ । लेकिन जिँदगी के करीब रहकर ही हम ऐसा कर सकते हैँ ।


पत्तोँ को हिलते हुए देखा है कभी । तो उनके धीरे धीरे हिलने मेँ शांति को महसूस कीजिए । नदी किनारे बैठिए और लहरोँ मेँ मन की गति को महसूस कीजिए । आसमान की ओर देखिये और जीवन के रहस्य को महसूस कीजिए । महसूस करने से ही हम सीख पाते हैँ । जिँदगी को पाने के प्रयास मेँ महसूस करने की प्रक्रिया का लाभ उठाईये । कुछ ही समय बाद महसूस होगा कि सोच गंभीर हो गई है । समझ मेँ आता है कि अगर हम इस संसार मेँ उलझ गये तो जीवन का उद्देश्य खत्म हो जाएगा । बस हम यहाँ कुछ सीखने आये हैँ और सीखकर ही हमेँ यहाँ से जाना है ।


हाँ समय का ध्यान रखिए । जिँदगी को किताबोँ मेँ मत ढूंढ़िए । सिद्धांतोँ की लाइब्रेरी मेँ भी मत पढ़िये । क्योँकि समय बहुत कम है । अगरबत्ती के धुँए से वायुमंडल पवित्र नहीँ हो सकता । न ही टेलिविजन पर विज्ञापन देने से धूम्रपान बन्द हो सकता है । खुद को अच्छी राह पर ले जाने की कोशिश कीजिए । लेकिन ध्यान रखिए सूर्य की किरणोँ से आप सीधे ऊर्जा नहीँ ले सकते । हर प्रक्रिया का एक क्रम है और संसार मेँ क्रम महत्वपूर्ण है । आप इस क्रम मेँ कहाँ है कोई नहीँ जानता । शायद आप जानते होँ ? पर हमेशा प्रगति के लिए मेहनत कीजिए । जल्द ही आपको वह दिखाई देगा जिसे खोजने का आप प्रयास कर रहे हैँ ।


लक्ष्य अनन्त है लेकिन संसार मेँ उस लक्ष्य को पाने के लिए कर्म करना पड़ता है । किस्मत अपने खेल खेलती है । सब हमारा ही किया हुआ है । बस हमेँ किस्मत के खेल मेँ एक खिलाड़ी बनना है । जीत और हार की उम्मीद छोड़ खेलना है । तभी हम जीत पाएँगे । हम कामयाब हो जाएँगे यदि हम भागना छोड़ देँ । यादोँ मेँ खोकर कुछ पाएँ और सो जाएँ । सुबह उठकर कहीँ जाना है . . . .

Sunday, April 18, 2010

एकांत

एकांत का अर्थ है -अकेलापन । जहाँ तुम अकेले हो वहाँ कोई और नहीँ हो सकता । लेकिन फिर कोई तो साथ होगा । जिँदगी का आनंद साथ होने मेँ है । प्रकृति के अंतरंग मेँ छिपकर नृत्य करने मेँ मन का आवरण दिखाई नहीँ देता । सभी एक होने का प्रयास करते हैँ । ब्रह्मांड के कण कण मेँ जो है , उससे मिलने का इंतजार करते हैँ । इस ब्रह्मांड मेँ जो रिक्त है , वह भी संपूर्ण है । फिर उस अनंत को एकांत मेँ महसूस करने का कोई कारण भी होना चाहिये । वह भी एकांत मेँ ही स्पष्ट होता है ।



ट्रेफिक मेँ निकलने मेँ समय लगता है । फिर हम ट्रेफिक मेँ रुककर सोच भी नहीँ सकते । अकेलेपन का आनंद अलग होता है । थ्री डायमेन्सनल स्पेस मेँ मूलबिन्दु को छोड़कर हर बिन्दु के निर्देशांक होते हैँ । हर किसी की अलग स्थिति होती है । लेकिन जो मूलबिन्दु से बहुत दूर अकेला होता है , वह सुकून मेँ होता है । भीड़ से बहुत दूर नहीँ पहुँचा जा सकता । हर कोई हम पर नजर रखता है । उस नजर से दूर एकांत मेँ सफलता की कल्पना विकसित होती है । वह राह मिलती है , जिस पर चलकर हमेँ बहुत दूर जाना है । उसे खोजना है , जो हमारे ही अंदर है । उस विश्वास को छूना है , जो हमेँ संतुष्टि देता है ।

Thursday, April 8, 2010

प्रकृति

चलते चलते बहुत दूर आ गया हूँ । जिँदगी की राहोँ मेँ सुकून है । लेकिन हर कोई उसे खोज रहा है जो अदृश्य है । वह परमाणु के नाभिक मेँ है । वह सूर्य की ऊर्जा मेँ है । वह विश्वास की परिधि मेँ है । हर कोई उसे पाना चाहता है ; अनन्त को छूना चाहता है । समय के साथ मन भी मॉडर्न हो गया है । आस्था कहीँ नहीँ है । जो है उसे छोड़कर हर कोई उसे खोज रहा है ; जो नहीँ है । मनुष्य का शरीर उस अनुभव का ही प्रतिबिँब है जो सीमा से परे है ।

Saturday, April 3, 2010

Life

Life is a changing experience...

Knowledge

Knowledge gives us Ideas.
Ideas inspires us to get more knowledge...

Friday, April 2, 2010

इंद्रधनुष

" विजेता कुछ अलग नहीँ करते , बल्कि किसी काम को अलग ढंग से करते हैँ । " शिव खेड़ा का यह कथन हमारे लिए है । हम क्या करना चाहते हैँ , यह तो हम निश्चित कर लेते हैँ । लेकिन हम यह निश्चित नहीँ कर पाते कि इस काम को किस तरह करना है । प्रकृति कितनी खूबसूरत है । हम अपने हर काम मेँ खूबसूरती डालना चाहते हैँ । सौँदर्य आभा विखेरता है । मन की चेतना सौँदर्य को महसूस करती है । एक बड़ा बदलाव जीवन मेँ यूँ ही नहीँ आता । हम बदलाव लाना चाहते हैँ । जीतना चाहते हैँ । सात रंगोँ से प्रकाश बनता है । प्रकाश के रंग इंद्रधनुष मेँ दिखाई देते हैँ । हर रंग की तरंगदैर्ध्य अलग होती है । ऐसा ही है जीवन । यह अपना सौँदर्य खुद विखेरता है । बस हमेँ इंतजार करना पड़ता है । शाम का इंतजार करते हुए दिन गुजर जाता है । फिर यह दिन कभी नहीँ आता ।



जो है आज और अभी है । पेड़ के नीचे की शान्ति मेँ जो मजा है , वह शॉपिँग मॉल मेँ नहीँ मिलता । बच्चे के चेहरे की हँसी से पता चलता है कि यह शुरूआत है । लेकिन जिँदगी आपको कोई वारंटी नहीँ देती । इसलिए कुछ अलग तरीके से लाइफ को एन्जॉय किया जाये । नियम तोड़ने के लिए बने हैँ । हर कोई पुराना विचार या तरीका अब काम नहीँ आता । नयेपन का जमाना है । अगर लोग इसी बात को मानते रहते कि सूर्य पृथ्वी के चक्कर लगाता है तो फिर हम अंतरिक्ष मेँ इतनी ऊँचाई तक कैसे पहुँच पाते ? हर किसी आविष्कारक ने पुराने विचारोँ और धारणाओँ का विश्लेषण किया है । उनमेँ संसोधन किया है । आविष्कार का अर्थ होता है खोजना । लेकिन कुछ नयी खोज हमेँ कुछ करने के लिए प्रेरित करती है । रात मेँ चमकते ध्रुव तारे को देखकर दिशा तय करने वाले नाविकोँ ने नये स्थानोँ की खोज की । विस्तृत समाज की दृष्टि व्यापक हुई तो कम्प्यूटर का आविष्कार हुआ । यही तो विजेता की पहचान है । हम जिस लक्ष्य को पाना चाहते हैँ उसे पा लेने पर विजेता बन जाते हैँ । न कि केवल उस रेस को जीतकर जिसे हर कोई जीतना चाहता है । हमेँ अपने लक्ष्य खुद निर्धारित करने होँगे । यही तो रफ्तार है , जिस पर हम चलना चाहते हैँ ।



बारिश की बूँदेँ एक नयापन लेकर आती हैँ । वृक्षोँ पर हरे पत्ते आने लगते हैँ । मौसम सुहावना हो जाता है । यही प्रकृति का सृजन है । हमारा सृजन हमारी अवस्थाओँ के साथ विकसित होता है । नई चुनौतियोँ और नये अवसरोँ के साथ हम और अधिक सृजनात्मक हो जाते हैँ । कई परिस्थितियोँ पर हमेँ टेन्शन होता है । लेकिन यही तो बात है जो विजेताओँ मेँ होती है कि वे टेन्शन मेँ अपना समय बर्बाद नहीँ करते । हर पल वे खुद को तरोताजा बनाने का प्रयास करते हैँ और हर चीज को किसी नये ढंग से करने का प्रयास करते हैँ । वे नई तकनीकेँ ढूँढ़ते हैँ जिससे समस्याएँ हल की जा सकेँ । हर नई तकनीक से मस्तिष्क की क्षमताओँ का विकास होता है । यही विकास सफलता देता है । सफल लोगोँ के पास खुशियाँ होती हैँ । लेकिन वे खुशियोँ को सहेजने का प्रयास नहीँ करते । इसलिए उन्हे टेन्शन नहीँ होता और वे सफलता के करीब आ जाते हैँ ।...